मातृभूमि तुझे प्रणाम: देश की सेवा सबसे पहले

एक फौजी की माँ के मन के अन्तर्द्वन्द को समझने के लिए पढ़े प्रीतम कोठरी द्वारा रचित मर्मस्पर्शी कहानी
मातृभूमि तुझे प्रणाम: देश की सेवा सबसे पहले

फीचर्स डेस्क। घड़ी में रात की 12:00 बज रहे थे और रोहित एकदम से चौंक कर उठ खड़ा हुआ।

फोन की घंटी रात के सन्नाटे को चीरती हुई उसके कानों में पड़ रही थी....

एक ही पल में वह चिंता में डूब गया... कि इतनी रात गये किसका फोन होगा....?

लड़खड़ाते हुए कदमों से वह फोन तक पहुंचा तो उसे खबर मिली कि उसे 2 दिन के अंदर ही आर्मी जॉइन करनी है उसकी छुट्टियां कैंसिल कर दी गई है और उसे तत्काल लौटना होगा।

यह खबर सुनते ही रोहित के चेहरे पर उदासी छा गई वह चिंता में डूब गया... क्योंकि वह अपनी माँ के कई बार फ़ोन करने पर आर्मी से छुट्टी लेकर गांव आया था अपनी बहन की शादी के लिए....

घर में शादी की तैयारियां चल रही थी और शादी की सभी जिम्मेदारियां रोहित के कंधों पर ही थी 

बारात आने का समय भी नजदीक आ रहा था....  और रोहित की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। वह यही सोच-सोच कर चिंतित हुए जा रहा था कि इस बारे में माँ को कैसे बताएगा..

रोहित के पापा भी आर्मी में ही थे और दुश्मनों के हाथों शहीद हो गए थे ।

उसके बाद से ही रोहित का एक सपना था कि.. मैं भी देश की सेवा के लिए कुछ करूंगा, यह धरती मेरी माँ है और मैं अपनी माँ के सम्मान में कभी पीछे नहीं हटूंगा..

पर एक तरफ बहन की शादी की जिम्मेदारियां उसे अपनी तरफ खींच रही थी तो दूसरी तरफ देश के प्रति उसका प्रेम....

इसी कशमकश में ना जाने कब उसकी आँख लग गई और वह गहरे ख्यालों में डूब गया...

सुबह माँ की चाय की प्याली के साथ मधुर आवाज सुनकर ही उसकी आँख खुली और उसने हिम्मत जुटाकर अपनी छुट्टी कैंसिल होने की  बात माँ को बताई....

एक बार यह बात सुनकर माँ के चेहरे पर उदासी छा गई और पीछे से यह बात उसकी बहन के कानों में भी पड़ी तो वह भी मुरझा सी गई....

रोहित की बहन मन ही मन यह विचार कर रही थी कि पिताजी भी इस दुनिया में नहीं है  और इकलौता भाई भी अगर शादी में नहीं रहेगा तो लोग क्या कहेंगे... शादी की जिम्मेदारियां कौन लेगा...?

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माँ भी यही सोच-सोच कर परेशान हुई जा रही थी....की बिना बेटे के शादी कैसे होगी...?

लेकिन कहते हैं ना कोई ना कोई राह जरूर नजर आ जाती है बस फिर क्या था...

सभी परिवार वालों ने मिलकर एक फैसला लिया और बहन की शादी दूसरे दिन ही निपटाने की बात परिवार वालों के सामने रखी...

मजे की बात तो यह रही कि बहन के ससुराल वाले भी मान गए और दूसरे ही दिन शादी धूमधाम से निपट गई.... 

माँ ने नम आंखों से अपनी बेटी को विदा किया और दूसरे दिन अपने बेटे को देश की सेवा के लिए सुपुर्द कर दिया…

इनपुट सोर्स:प्रीतम कोठारी

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