तुम याद आए: नैनो में हजारों सपने छाए

जब फौजी हो पति तो उसकी पत्नी के नसीब में होता है एक लंबा इंतजार। कब खत्म होगा ये इंतजार कब आएगी मिलन की बाहर। आंखे रहती है बेकरार करने को उनका दीदार। इस दर्द को अपनी अभिव्यक्ति में किया है साकार अंजू भारती ने पढ़िएगा जरूर।
तुम याद आए: नैनो में हजारों सपने छाए

फीचर्स डेस्क। कितने दिनों बाद मिले हो।

अंतस में यूँ फूल खिले हो।

जीवन को मधुमास मिला!

फिर तुम्हारा अहसास मिला।

चेहरे पर आत्मविश्वास वही पर,

आंखों में एक नमी लिए हो।

अधरों पर स्मित सी हंसी।

तुम।

कितने दिनों बाद मिले हो।।

दिल धड़कन धक-धक करती!!

साँसे भी बेकाबू सी चलती।

पंख समय के लगे हों मानों,

अरमानों की लिये पोटली,

बिछड़े हुए पंछी बोलो कैसे,

उड़कर हम तक पहुंचे हो 

तुम।

कितने दिनों बाद मिले हो। 

यादों के बदरा भी बैरी बन!

नैनों की बरसात लिये अब,

उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं।

बात बहुत थी और शिकवे भी ,

किन्तु अब इतना है कहना।

इन राहों पे ए राही .......

जल्दी मिलने आना तुम!!

बस  यादों में मिलते हो।।

इनपुट सोर्स: अन्जु भारती नोएडा

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इमेज सोर्स:गूगल


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