माँ कि बातें आज भी याद हैं : माँ बोलने से माँ बनने का सफर...

माँ कि बातें आज भी याद हैं : माँ बोलने से माँ बनने का सफर...

फीचर्स डेस्क। इस साल 9 मई को मदर्स डे है। वैसे तो मेरे देश में माँ का कोई मोल नहीं और ना ही कोई कर्ज उतार सकता है माँ का। फिर भी फोकस हर लाइफ लखनऊ क्लब शाखा की मेम्बर्स ने अपनी माँ के लिए कुछ चंद लाइने लेख के रूप में, कविता के रूप में, उनकी बताई बातें, उनकी कुछ यादगार पल हमारे साथ शेयर करने की बहुत सुंदर कोशिश की है। दरअसल, इनके इस प्रयास में और अच्छा कुछ करने की प्रोत्साहन के लिए focusherlife जो की एक वोमेंस स्पेशल हिन्दी आर्टिकल वेबसाइट हैं, एक “माँ कि बातें आज भी याद हैं” प्रतियोगिता रखी हैं। जिसमे सभी मेम्बर को अपनी माँ के लिए कुछ न कुछ लाइन लिखनी हैं। इस प्रतियोगिता का रिजल्ट 15 मई को घोषित किया जाएगा। जिसमे 3 विनर को मिलेगे प्राइज़। इसी क्रम में दूसरी प्रतियोगी हैं रुपाली श्रीवास्तव जिन्होने माँ की बात याद कर के लिखा कि-

जब आप अपनी माँ की आँखों में देखते हैं, तो आपको पता चलेगा कि यह इस धरती पर मिलने वाला सबसे शुद्ध प्रेम है। बिना किसी आशा के माँ निःस्वार्थ हमको प्यार और संस्कार देती है पूरा जीवन। मेरी माँ से मैंने सबसे ज्यादा डांट खाई ,क्योंकि शुरू से ही मैं चीजे अपनी तरह से देखती थी। माँ ने मुझे परिस्थितियों के हिसाब से निर्णय लेना सिखाया ,की कभी आप को सब आसानी से भी मिल जाएगा और कभी आप को बमशक्क्त मिलेगा तो इन बदलती परिस्थिति में आप को हारना नही है बस प्रयासरत रहना है,

आज जब लोग बोलते है कि ( आप शांत है इतना कैसे सबर कर लेती  है) तब आप की सीख याद रहती है माँ, मैंने अपने जीवन में कई  दोस्त बनाए हैं, लेकिन मेरी मां वही है जो मेरे दिल के सबसे करीब है, जब भी स्थिति ने मांग की, मेरा समर्थन किया। हमने भी एक साथ good time  बिताया है, जैसे कि सबसे अच्छे दोस्त करते हैं।

मुसीबत में मेरा साथी

वह ऐसी व्यक्ति है जो मुझे कभी भी समय मांगने की अनुमति नहीं देती  है और मुझे  सहज बनाने के लिए हर संभव कोशिश करती  है। मेरे लिए, मुझे नहीं लगता कि मेरी माँ की तुलना में कोई और इस भूमिका के लिए बेहतर है,और हम दोनों एक दोस्ताना संबंध साझा करते हैं, जो समय की कसौटी पर सफलतापूर्वक खरा उतरा है।

अब दो लाइन माँ के लिए --

चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है,

मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है।

समय बीत गया और मैं बड़ी हुई और  फिर एक दिन वो दिन भी आया जब मैं माँ बनी ,समयांतराल बदल गए पर मम्मी की सीख नही जो मैंने माँ से पाया आज वो अपने बच्चों को देनी को कोशिश कर रही हूँ।हांलाकि अब बच्चे ज्यादा समझदार है ,जल्दी सीख जाते है वार्ना हम लोग तो जब तक जब तक मुह पर हाँथ का निशान न देख ले मजाल है कि ज्ञान अर्जित हो।  मैं अपनी बात नही कर रही हूँ।

रुपाली श्रीवास्तव, मेम्बर फोकस हर लाइफ क्लब, लखनऊ शाखा।


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