क्या यह वही है: यादों में दिल खो गया, यूं लगा मानो कुछ हो गया

प्यार, जिसको मिल जाए जिंदगी हसीन हो जाती है। जिसको न मिले उसे चाहे सब कुछ मिल जाएं फिर भी कुछ कमी रह जाती है।
क्या यह वही है: यादों में दिल खो गया, यूं लगा मानो कुछ हो गया

फीचर्स डेस्क।कुछ बच्चों के एप्लीकेशन फॉर्म टेबल पर रखे थे। चाय का कप नीचे रखते हुए रिया ने उन पर निगाह डाली और बहुत जरूरी काम समझते हुए उन्हें अपनी ओर सरका लिया ।वह एप्लीकेशन पढ़कर उस पर इंटरव्यू की तारीख लिखती जा रही थी कि आखरी फॉर्म पर नजर पड़ते ही वह रुक गई, पिता का नाम 'निमिष कपूर'। उसका दिल एक क्षण को मानो धड़कना भूल गया । क्या यह वही है ? उसने अपना ध्यान वहां से हटाने की कोशिश की और आखिरी तारीख लिखकर घंटी बजाई। फॉर्म भेजने के बाद वह चलने के लिए उठ गई । विद्यालय की छुट्टी हो चुकी थी इसलिए वह घर की ओर चल पड़ी। रिया शहर के इस जाने-माने विद्यालय की प्रिंसिपल है । रिया खाना खाकर लेटी ही थी कि उसे फिर याद आ गया 'निमिष कपूर' क्या यह वही निमिष होगा जिसने निमिष  मात्र में उसके जीवन का रस सोख लिया था।  वह अपने यादों के भंवर में डूबती जा रही थी । सुंदर सलोना हंसमुख चेहरा ,ऊंचा कद, गोरा रंग ,घुंघराले बाल और आत्मविश्वास से भरी आवाज । जब वह पहली ही बार मिला था , रिया खुद को सम्मोहित होने से नहीं रोक पाई थी । निमिष एक नामी कंपनी में इंजीनियर था और उसके पिता नरेश के अभिन्न मित्र कमल जी का लड़का था । एक दिन काम के सिलसिले में कहीं जाते हुए वे रास्ते में रिया के घर आए थे । चाय नाश्ते के बाद कुछ देर  वहां रुके भी थे। लेकिन उनके जाने के बाद भी रिया अपने दिल पर अंकित निमिष के चेहरे की वह छाप हटा  नहीं पाई थी। उसकी हँसती आंखें और उन्मुक्त हंसी उसके कानों में कई दिन तक गूंजती रहीं। 

भाई-बहनों में सबसे बड़ी रिया पढ़ने में तेज और व्यवहार में शर्मीली थी । एम ए करने के बाद उसने बीएड किया और एक विद्यालय में अध्यापिका की नौकरी करने लगी। अब रिया के माता-पिता उसके  विवाह के विषय में  सोचने लगे थे । एक दिन शाम को जब उसके पिता काम से घर लौटे तो उनके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव थे। चाय पीते हुए उन्होंने अपनी पत्नी संध्या से कहा," आज कमल का फोन आया था वह रिया को अपने घर की बहू बनाना चाहता है ।"  रिया सोचने लगी ,"यह कमल कौन है ?"तभी उसकी मां बोली," निमि ष  लड़का तो बहुत सुंदर है राजकुमार जैसा, लगता है दोनों की जोड़ी बहुत सुंदर  लगेगी।" कमल ने कहा,"अगर तुम लोग राजी हो तो मैं बात बढाऊँ।" नरेश बोले,"लड़का अच्छा है, पढ़ा-लिखा है, इंजीनियर भी है, घर भी अच्छा खाता-पीता है पर दोस्ती का मामला है ,कहीं का कुछ ना हो जाए, पता नहीं क्यों कुछ संकोच हो रहा है ?"  " छोड़ो जी ! तुम हमेशा उल्टी बात ही क्यों सोचते हो ? कमल भाई साहब और भाभी जी दोनों ही कितने समझदार हैं । परिवार छोटा है और निमिष वह तो है ही इतना सुंदर ,और मुझे तो वह उसी दिन बहुत अच्छा लगा था ।" संध्या ने प्रसन्न होते हुए कहा।

निमिष का नाम सुन कर रिया के पैरों में बिजली की सी ताकत आ गई । कमरे में आई और आईने के सामने खड़ी हो गई ।उसने अपने लंबे बाल खोल दिए उसकी आंखों में सपनों का सागर सा लहरा रहा था । उसे अपने भाग्य पर भरोसा न हुआ ।अपने आप से पूछने लगी कि क्या ऐसा हो सकता है ? जिसे मेरे दिल ने एक ही नजर में पसंद कर लिया था वही मेरा जीवन साथी बनेगा?क्या उसे भी मैं अच्छी लगी थी ? क्या कहा होगा उसने अपनी मां को? खयालों में सिनेमा का दृश्य सजीव हो गया। 

निमिष अपनी मां के पास खड़ा है । साड़ी का पल्लू उंगलियों में लपेटता हुआ  कहता है," मां तुमसे कुछ कहना है ।" " क्या !बोल  मैं सुन रही हूं ?" चाय कप में डालते हुए सुनंदा बोली ।" मां तुम्हें रिया कैसी लगी ?" निमिष ने जल्दी से कहा और मां के चेहरे की ओर देखने लगा ।  " रिया! कौन रिया ?  कहीं नरेश भाई साहब की लड़की तो नहीं।" सुनंदा कप ट्रे में रखते हुए बोली। " रिया कहां है ?  तेरा नाश्ता रखा है जल्दी आ।" माँ की आवाज से रिया का ध्यान टूटा ,उसने हड़बड़ा कर बैग उठाया और कमरे से निकलने लगी ,शीशे पर नजर पड़ते ही उसे निमिष का मुस्कुराता शरमाता चेहरा अपनी ओर देखता नजर आया ,उसने अपना ध्यान हटाया और कमरे से बाहर निकल गई।

गुटर गूँ , गुटर गूँ की आवाज ने  रिया का ध्यान खींचा। कबूतर का जोड़ा था। वे दोनों खुश हैं।रिया को उस दिन की याद आई । सब कुछ ठीक हो गया था सगाई हो गई, मेहमानों से घर खचाखच भरा था । निमिष और उसकी जोड़ी जो कोई भी देखता कहना ना भूलता भगवान ने यह जोड़ी अपने हाथ से बनाई है, देवी देवताओं का सा जोड़ा लगता है। गुलाबी लहंगे में रिया किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। सगाई के बाद निमिष ने बुला लिया," तुमसे अकेले में मिलने को जी कर रहा है ,चार दिन के बाद मेरा जन्मदिन है,आओगी मिलने रिया।" "पापा इजाजत नहीं देंगे, मैं नहीं आऊंगी ,मुझे डर लगता है ।" रिया ने कहा।" मेरी मम्मी आंटी से पूछ लेंगी,आ जाना,मैं इंतज़ार करेगा ।"निमिष ने जाते-जाते अधिकार से बोला । 

"काश ! पापा मुझे जाने की इजाजत ना देते पर निमिष  ऐसा निकलेगा, यह कौन जानता था? अकेले जाने की हिम्मत ना थी इसलिए अपनी सहेली सोनम को ले गई। शादी की तारीख निश्चित हो गई और उसकी मम्मी-पापा उसे कपड़े और गहने भी दिलाने भी ले जाने लगे। संध्या और रिया के साथ सोनम भी जाती थी सब कुछ सपनों सा सुंदर था ।

शादी वाले दिन सुबह से ही घर में चहल-पहल थी सारा घर दुल्हन की तरह सजाया गया था। शाम का समय था । कुछ देर में बारात आने वाली थी। रिया दुल्हन के लिबास में सहेलियों के साथ बैठी थी कि फोन की घंटी बजी । नरेश रिया के पिता ने फोन उठाकर बात की ,ना जाने क्या हुआ ? कि वे गश खाकर गिर पड़े। घर में कोहराम सा आ गया । डॉक्टर बोला," मैंने इंजेक्शन दे दिया है, अभी होश में आ जाएंगे।"थोड़ी देर में ही नरेश को होश आ गया ,दरवाजे पर कमल और सुनंदा खड़े थे। कमल आकर उसके पैरों पर गिर गया," मुझे माफ कर दे दोस्त, हम बर्बाद हो गए लड़के ने हमें कहीं का ना रखा।"   किसी को कुछ समझ नहीं आया आ रहा था कि क्या हुआ ? नरेश की आंखों से आंसू बह रहे थे। संध्या बेचैन होकर बोली ,आखिर कोई मुझे बताएगा क्या हुआ? कमल ने एक कागज का टुकड़ा उसकी और बढ़ा दिया। उस पर लिखा था ," मुझे माफ कर देना मैं अपनी जिंदगी खराब नहीं कर सकता । मुझे रिया पसंद नहीं है, मैं सोनम से शादी कर रहा हूँ। आपका बेटा निमिष।"

कुछ ही देर में हंसता खिलखिलता माहौल उजाड़ में बदल गया।  कमल बर्दाश्त न कर सके और दो महीने बाद ही चल बसे। रिया को शादी के लिए बहुत मनाया गया पर उसका मन तो अब  शादी से उठ चुका था ।माता-पिता के जोर देने पर एक दो लड़के देखे भी पर कोई उसकी आंखों को ना जंचा।। उसने निमिष को भी माफ कर दिया। माता-पिता ने छोटे बच्चों की शादी कर दी। रिया अध्यापिका से प्रिंसिपल बन गई । काम में व्यस्त रहती है। गलती से भी उस दर्द भरे अफसाने को याद नहीं करती पर, आज वह फिर याद आ गया ,क्या यह वही है? उसकी आंखों से दो आँसू ढुलक गए।

इनपुट सोर्स: मंजुला शर्मा 

इमेज सोर्स: गूगल

 


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