देश की पहली ट्रक ड्राइवर योगिता रघुवंशी: लॉ छोड़ क्यों चुना ट्रक ड्राइवर का प्रोफेशन, जाने उनकी स्ट्रगल स्टोरी

एक औरत जब कुछ ठान लेती है तो फिर रास्ते में आई तकलीफ उसे डगमगा नहीं सकती। ऐसी ही एक सशक्त महिला की कहानी जानेंगे हम इस आर्टिकल के जरिए जिसने लोगों की परवाह न करते हुए अपने दिल की सुनी और कामयाब भी हुई।
देश की पहली ट्रक ड्राइवर योगिता रघुवंशी: लॉ छोड़ क्यों चुना ट्रक ड्राइवर का प्रोफेशन, जाने उनकी स्ट्रगल स्टोरी
देश की पहली ट्रक ड्राइवर योगिता रघुवंशी: लॉ छोड़ क्यों चुना ट्रक ड्राइवर का प्रोफेशन, जाने उनकी स्ट्रगल स्टोरी

फीचर्स डेस्क। औरत शक्ति का रूप है । इस बात की जीती जागती मिसाल है योगिता रघुवंशी। पति की मृत्यु के बाद एक औरत का संभल पाना बहुत मुश्किल होता है। पर कहते है न कि एक औरत जब बन जाती है एक मां तो फिर वो हार मान ही नहीं सकती। योगिता भी कैसे बैठ सकती थी, उन्हें संभालनी थी अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी। उन्होंने लोगों की सहानुभूति को स्वीकार न करके चुनी संघर्ष भरी राह,जिसमे बेशक कांटे थे पर उसमे था आत्मसम्मान। आइए जानते है योगिता रघुवंशी के संघर्ष और हौसले की दास्तान।

लॉ करने के बावजूद चुना ट्रक ड्राइवर का प्रोफेशन

योगिता रघुवंशी ने लॉ की डिग्री की हुई है । उसके बाद भी ये ट्रक चलाती है। जानना चाहेंगे क्यों? क्योंकि जब 2003 में इनके पति की मृत्यु हुई तब इनके बच्चे बहुत छोटे थे। और अगर ये लॉ में अपना प्रोफेशन बनाती तो इनको या तो कुछ साल कम इनकम होती या होती ही न। लॉ के साथ ही इन्होंने कॉमर्स भी ले रखी है साथ ही ब्यूटीशियन का कोर्स भी किया है पर इन सब से तुरंत आय नही मिल सकती थी और जीवन के ऐसे मोड़ पर ये रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इनके पति का ट्रक था, इन्होंने उसे चलाने के लिए ड्राइवर भी रखा पर बात बनी नहीं। तब योगिता ने ड्राइविंग सीखने का फैसला किया और ड्राइविंग सीख भी गई। पहले उनके लिए गियर, ब्रेक, स्टेयरिंग ये सब समझना आसान नहीं था। पर वो कहते है न कि कोशिश करने वालो की कभी हार नही होती। उन्होंने कोशिश की और वो कामयाब भी हुई, अब भोपाल से दुनिया के हर कोने में ये ट्रक चलाती है और बहुत अच्छे तरीके से चलाती है।

सुनने पड़े कई ताने पर नहीं मानी हार

कोई भी काम आसान नहीं होता उसे आसान बनाना पड़ता है अपने हौसलों से। योगिता ने जब ट्रक ड्राइवर बनने का सोचा तभी कई लोगों ने उनसे कहा कि ये फील्ड लेडीज के लिए नहीं है पर योगिता पीछे नहीं हटी। उनका मानना है कि ये कोई और तय नहीं करेगा कि ये फील्ड लड़कियों के लिए है या वो फील्ड। ये तय करने का काम सिर्फ उसका खुद का है। इंपॉसिबल शब्द को अपनी डिक्शनरी से निकाल देना चाहिए। योगिता को कई परेशानियों जैसे रास्ते में टायर का फट जाना ,डीजल का खत्म होना इन प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा पर किसी न किसी से हेल्प मिलती गई और रास्ता आसान होता गया।

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मिला परिवार और दोस्तों का साथ

योगिता इस मामले में काफी लकी रही। उनको हर कदम पर अपने परिवार का साथ मिलता रहा। और सबसे ज्यादा सपोर्ट तो उनके बच्चों ने उनका किया। जितना उन्होंने सोचा भी नहीं था। योगिता कहती है कि दोस्तो का साथ जिंदगी में होना ही चाहिए। योगिता जहां जहां भी जाती है दोस्त बना ही लेती है। रास्ते में जब ये किसी ढाबे में जाती है तब सभी लोग इनका बड़ी गर्मजोशी से स्वागत करते है। ये देखकर उनको बहुत अच्छा और अपनापन महसूस होता है।

बन चुकी है शॉर्ट फिल्म

शेल इंडिया कैंपेन के तहत योगिता के जीवन के ऊपर एक शॉर्ट फिल्म भी बन चुकी है। जो योगिता को बहुत अच्छी भी लगी। उनकी लाइफ से रिलेटेड ये फिल्म हमें प्रेरणा देती है कि जीवन चलने का नाम है रुकने का नहीं। जब हम आगे बढ़ेंगे तभी सफल हो सकेंगे।

देना चाहती है महिलाओं को सक्सेस मंत्र

योगिता सभी महिलाओं को कहना चाहती है कि सबसे पहले अपने मन से डर को निकाले। अपने आस पास जो बाउंड्री बनाई है उसे तोड़े। उससे बाहर निकले ,कोशिश करें। एक कदम आगे अपने सपनों की ओर बढ़ा कर तो देखो सफलता आपको जरूर मिलेगी।  बस पॉजिटिव सोचिए नेगेटिव बातों को अपने ऊपर हावी न होने दें। रास्ते में जो कठिनाइयां आ रही है उनका सामना करें उनसे घबराए न।

लोगों की बातों को दिल से न लगाएं ये ही शिक्षा देती है  49 वर्षीय योगिता रघुवंशी। आपके जज्बे को सलाम। ऐसे ही आगे बढ़ती रहिए और आपके जैसी हजारों महिलाओं की ताकत बनिए।

आपको ये आर्टिकल कैसा लगा बताए जरूर। साथ ही यदि आपके आस पास ऐसी कोई महिला है तो हमे बताए editor@focusherlife.com  पर मेल करके। हम उनकी स्टोरी अपनी वेबसाइट www. focusherlife.com में जरूर पब्लिश करेंगे।

picture credit: Google
 


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