नन्हा सांता क्लॉज़

नन्हा सांता क्लॉज़

*नन्हा सांता क्लॉज़*

शिवम की क्रिसमस की छुट्टियां लग गई थीं... अगले दिन याने 25दिसंबर को क्रिसमस मनाने को लेकर शिवम बहुत उत्साहित था।रुचि भी ब्राऊन केक बना रही थी।उसने राजेश को पहले ही शिवम की विश  लिस्ट दे दी थी ताकि रात में चुपके से शिवम के तकिए के नीचे रखकर उसे सरप्राइज दिया जा सके।

"दीदी... मैंने सब तैयारी कर दी है... और कुछ काम हो तो बता दीजिए..."कामवाली कांती ने रुचि से कहा।

"हाँ....आटा भी लगा दे...तुझे देर तो नही हो रही ना.."रुचि ने कांती से पूछा।

"नही दीदी...मैं आटा लगा देती हूं... आज तो रघु को साथ लाई हूँ... सो घर जाने की जल्दी नही है....कांती ने जवाब दिया।

"अच्छा... कहाँ है रघु..."रुचि ने पूछा।

"बाहर गलियारे में बैठा है... धूप सेंक रहा है..."कांती ने कहा और आटा निकालने लगी।

शिवम खेलते हुए गलियारे में गया तो उसने देखा लगभग उसी का हमउम्र रघु एक कोने में बैठा है।उसने फटे पुराने से कपड़े पहने थे.... कोई स्वेटर नही.. पैरों में मोज़े नही...धूप में भी उसे ठंड लग रही है।

"तुम्हारे घर सांता आता है..."शिवम ने रघु से पूछा।

"कौन सांता....?" रघु ने प्रतिप्रश्न किया।

"तुम्हें नही पता....सांता बच्चों का दोस्त है... वो बच्चों की  विश पूरी करता है....बच्चों को खिलोने और मिठाई के तोहफे देकर जाता है..."शिवम ने कहा।

"अच्छा.... क्या सचमुच?....?"शिवम ने उत्सुकता से पूछा।

"हाँ....तुम्हारी जो भी इच्छा हो उसे एक कागज़ पर लिखकर उसे मोज़े मे रखकर, उस मोज़े को दरवाज़े पर टांग देना.... रात में सांता आएगा और उस मोज़े मे तुम्हारे लिए तुम्हारी इच्छा की चीज़ ,.तोहफे मे दे जाएगा..."शिवम ने अपनी समझ के अनुसार रघु को विस्तार में बताया।

"ओह.... लेकिन मेरे पास तो मोज़े है ही नहीं...."रघु ने उदास स्वर में कहा।

"ओह...."शिवम भी उदास हो गया।

तभी कांती काम खत्म कर बाहर आ गई... और रघु को चलने को कहा।

रघु जाते हुए रुंआसे भाव से शिवम को देखते हुए चला गया।

उसके जाने के बाद शिवम दौड़कर अपने कमरे में गया.... उसने जल्दी से एक स्वेटर, दो तीन जोड़ मोज़े, एक जोड़ी जूते, अपने कुछ खिलौने ....इन सभी चीज़ों को एक लाल रंग के बैग डाला और रुचि के पास आकर बोला..

"माँ.....जल्दी चलो....कांती आंटी के घर....।"

"अरे क्यों.... क्या बात है...."रुचि ने हैरत से पूछा।

"माँ....रघु के घर सांता नही आते....क्योंकि उसके पास मोज़े नही है...इसलिए मैंने  इस बैग में उसके लिए तोहफे रखें हैं.... माँ..चलो...हम उसे ये दे आऐं.... मैंने इसमें मोज़े भी रखें हैं.... ताकि रघु की भी हर इच्छा भी पूरी हो जाए...."शिवम ने मासूमियत से रुचि से कहा।

रुचि की आँखें भर आईं....

उसने शिवम को बाँहो मे भर लिया।

रुचि ने उसी बैग मे ब्राऊन केक, कुछ मिठाई, फल और चॉकलेट्स भी रख लिए।

अगले ही पल गाड़ी में सवार एक नन्हा सांता... फ़रिश्ता बन कर एक नन्हे के जीवन मे सच्ची खुशियां भरने जा रहा था।

*नम्रता सरन "सोना"*

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