Category : फोकस स्पेशल स्टोरी

मेरे हिस्से की माँ

उस दिन माँ को बुखार था तो जुस्टिना ऑफिस से जल्दी घर जाना चाहती थी। वो कागज़ पर अर्जी लिखकर उस नई अफसर के सामने खड़ी हो गई। “ माँ आपके...

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कितने तूफान

समाज की चुभती हुई नज़रों को केतकी साफ महसूस करती थी। अकेली औरत वैसे भी कहीं दया की पात्र बन जाती है तो कहीं ललचाई नज़रों का भाजन । उसे...

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अब वो आज़ाद है...

पुरानी बातें आज सुधा के मस्तिष्क पटल पर सिनेमा की तरह चल रही थी जिन्हें याद करके सुधा मन ही मन मुस्कुरा उठी। इस खेती बाड़ी वाले इलाके...

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